रात्रि का समय शांति और सहजता का होता है। दिनभर की गतिविधियों के बाद बुज़ुर्गों को सादा, सुपाच्य और गरम भोजन परोसा जाता है। भोजन के दौरान माहौल शांत और पारिवारिक होता है, जहाँ सभी मिलकर बैठते हैं। भोजन के बाद थोड़ी देर आराम या हल्की बातचीत होती है, फिर सभी अपने कमरों में चले जाते हैं। रात 9 बजे तक पूरा परिसर शांत हो जाता है, जिससे बुज़ुर्गों को एक गहरी और सुकूनभरी नींद मिल सके।